संसाधनों का धारणीय विकास% प्रयागराज Ό इलाहाबाद ½ स्मार्ट सिटी के विशेष सन्दर्भ मे
(Sustainable Development of Resources: with Special Refererice to Prayagraj (Allahabad) Smart City)
शिखा शर्मा1] आर- सी- सिंह2
1शोधार्थी] भूगोल विभाग] सी-एम-पी-] डिग्री कॉलेज] इलाहाबाद विश्वविद्यालय] प्रयागराज।
2एसोसिएट प्रोफेसर] भूगोल विभाग] सी-एम-पी- डिग्री कॉलेज] इलाहाबाद विश्वविद्यालय] प्रयागराज।
*Corresponding Author E-mail:
ABSTRACT:
इस अनुसन्धान कार्य मे प्रयागराज मे स्मार्ट सिटी योजना के लागू होने के बाद यहॉ के मानवीय और प्राकृतिक संसाधनो पर स्मार्ट सिटी योजना के पड़ने वाले प्रभावो का विश्लेषण किया गया है। सर्वप्रथम इस अनुसंधान कार्य में इस धारणीय विकास की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए, इसका मानवीय और प्राकृतिक संसाधनो के सम्बन्ध को जानने का प्रयास किया गया है। इसके उपरान्त स्मार्ट सिटी योजना के प्रयागराज मे लागू होने के बाद प्रयागराज के मानवीय और प्राकृतिक संसाधनो पर इसके पड़ने वाले प्रभावो तथा उसके लाभ और हानि का विशेषण किया गया है साथ ही SWOT विश्लेषण विधि के माघ्यम से यह भी जानने का प्रयास किया गया है कि स्मार्ट सिटी योजना का प्रयागराज के सुन्दर्भ मे क्या स्ट्रेथ] विकनेस] आपॉचुनिटी और थ्रेट क्या है।
KEYWORDS: संसाधन] धारणीय विकास] स्मार्ट सिटी प्रयागराज] प्रयागराज] विकास] पृथ्वी] मानव] जलवायु] समावेश] संरक्षण।
प्रस्तावना %&
विकास की वह प्रक्रिया जिसमे संसाधनो का इस प्रकार से उपयोग किया जाएँ कि वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं की भी पूर्ति हो जाए और भविष्य के लिए भी संसाधन बचे रहे, उसे धारणीय विकास (Sustainable Development) कहते है। धारणीय विकास की इस सर्वमान्य और लोकप्रिय परिभाषा को ब्रटलैण्ड आयोग के रियोर्ट हमारा साझा भविष्य (Our Common Future) मे वर्ष 1987 मे दिया गया था। इस प्रकार धारणीय विकास एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमे मानव और हमारे पृथ्वी का समावेशी और धारणीय विकास किया जा सकें।
धारणीय विकास की आवश्यकता:-
हमारे पृथ्वी और मानव जाति कि लिए धारणीय विकास की आवश्यकता निम्न तीन कारणो से परिलक्षित होती है
1. जलवायु परिवर्तन
2. संसाधनो की कमी
3. प्राकृतिक संसाधनो का अति दोहन
1. जलवायु परिवर्तन (Climate Change):- जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान बढ़ रहा है जिससे वायुमण्डल मे अनेक मौसमी घटनाएँ उत्पन्न हो रही है। जलवायु परिवर्तन के कारण बर्फ पिछल रही है जिससे समुद्री जल का स्तर बढ़ रहा है।
2. संसाधनो की कमी (Scarcity of Resources):- विश्व खाद्य संगठन के अनुसार आने वाले वर्षो मे जिस अनुपात मे जनसंख्या मे वृद्धि हो रही है, खाद्य उत्पादन के दोगुना होने की आवश्यकता है, जबकि ऐसी आशा व्यक्त की जा रही है कि आगामी 40 वर्षो मे कुल वैश्विक कृषि भूमि के 23 % भाग का ह्रास (Degradation) हो जायेगा। एक यह भी आशा व्यक्त कि जा रही है कि वर्ष 2025 तक कुल वैश्विक जनसंख्या का 2/3 भाग जल की कमी वाले क्षेत्रो मे निवास करेगी।
3. प्राकृतिक संसाधनो का अति दोहन (Over exploitation of natural resources):- आगामी 40 वर्षो मे 1 मिलियन जीव जन्तु एवं पेड़ पौधे जो जैवविविधता को बनाएँ रखने मे सहायक है, समाप्त हो जायेंगे।
धारणीय विकास के 3 प्रमुख तत्व है-
1. पर्यावरण संरक्षण
2. सामाजिक समावेशन
3. आर्थिक विकास
धारणीय विकास धारणीय जीवन यापन के लिए आवश्यक है, ताकि मानव प्रकृति के साथ जुड़ कर रह सके साथ ही धारणीय विकास के लिए यह भी आवश्यक है ऐसी तकनीकी का विकास किया जाएँ जिससे संसाधनो का संरक्षण सुनिश्चित हो सके। धारणीय और सतत विकास के लिए यह भी आवश्यक है कि संसाधनो का इस प्रकार विवेकपूर्ण तरीके से संरक्षण या प्रयोग किया जाएँ जिससे भविष्य के लिए संसाधन बचे रहें। पर्यावरण संरक्षण के लिए यह आवश्यक है कि ऊर्जा के गैर परम्परागत स्त्रोतो मे निवेश किया जाए जो समाज एवं पर्यावरण के लिए उपयोगी हो। धारणीय सामाजिक विकास हेतु लैगिक समानता, जनसंख्या के कौशल विकास, संसाधनो के न्यायोचित वितरण पर ध्यान दिया जाये, जिससे मनुष्य समाज मे अपनी मूलभूत आवश्यकताओ जैसे - भोजन, वस्त्र, आवास, स्वास्थ्य और शिक्षा आदि से वंचित न रह जाए अर्थात एक जैसी सामाजिक व्यवस्था को अपनाया जाएँ जिससे कोई भी व्यक्ति पीछे न छूटे ।
धारणीय आर्थिक विकास की प्रक्रिया ऐसी हो जो सभी के लिए सामान अवसर उपलब्ध कराये, साथ ही अर्थव्यवस्था मे धन का सामान वितरण उपलब्ध कराये जिससे समाज के हाशिये पर खडे़ व्यक्ति को भी अर्थिक विकास की परिधि मे समाहित किया जा सके। यदि समाज मे रहने वाले लोगो के द्वारा धारणीय अर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय विकास मे सहयोग दिया जाए तो इससे न केवल संसाधनो का धारणीय विकास होगा बल्कि नए संसाधनो के सृजन द्वारा अनेक अर्थिक, सामजिक और पर्यावरणीय समस्याओ को समाप्त किया जा सकेगा, इसके लिए आवश्यक है कि पुरातन तकनीक के साथ-साथ नवीन तकनीक जिसे सामुदायिक ज्ञान (Community Knowledge) कहा जाता है के विकास पर जोर दिया जाए, जिससे पृथ्वी और पर्यावरण की जैवविधता पर जोर देकर उसे अक्षुण्ण बनाया जा सके । राष्ट्रीय आयुष मिशन (NAM) Source: www.wikipedia इसका ज्वलन्त उदाहरण है ।
धारणीय विकास से सम्बन्धित क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दे:-
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क्र. सं. |
धारणीय विकास से संबंधित क्षेत्रीय मुद्दे |
धारणीय विकास से संबंधित वैश्विक मुद्दे |
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1. |
वनों का विनाश |
जैव विविधता का हृास |
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2. |
बाढ़ |
जलवायु परिवर्तन |
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3. |
मृदा (भूमि) का क्षरण |
सागरीय जलस्तर में वृद्धि |
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4. |
सागरीय जलस्तर में वृद्धि |
असामान्य आर्थिक विकास |
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5. |
सूखा का बारम्बारता |
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6. |
बिजली गिरने की घटना |
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7. |
बादल फटने की घटना |
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Source: www.wikipedia
संसाधन:
संसाधन वह सब कुछ है जिसकी उपयोगिता होती है और जो मानव जीवन में मूल्य जोड़ता है। पौधे, हवा, पानी, जानवर, भोजन, खनिज, धातु और सब कुछ जो प्रकृति में मौजूद है और मानव जीवन के लिए उपयोगी है, संसाधन है। समय और तकनीकी दो सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं जो किसी भी पदार्थ को संसाधन में बदल सकते हैं। संसाधन प्रमुख रूप से 2 प्रकार के होते हैं -
1. प्राकृतिक संसाधन
2. मानव निर्मित संसाधन
1. प्राकृतिक संसाधन
a. जैविक और अजैविक प्राकृतिक संसाधन
b. नवीकरणीय और गैर नवीकरणीय प्राकृतिक संसाधन
c. संभावित, विकसित और स्टॉक प्राकृतिक संसाधन
2. मानव निर्मित प्राकृतिक संसाधन:
जब मानव प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग करके कुछ नया तथा जो मानव हेतु उपयोगी हो और नवीन मूल्यों का निर्माण करता है तो उसे मानवनिर्मित, प्राकृतिक संसाधन कहते हैं। मनुष्य के पास कौशल बुद्धि और ज्ञान है जिसका प्रयोग करके मानव प्राकृतिक संसाधनों को उपयोगी और मूल्यवान बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का प्रयोग करता है और मानव स्वयं एक संसाधन बन जाता है।
विकास की वह प्रक्रिया जिसमें संसाधनों का उपयोग इस प्रकार किया जाये की वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं की पूर्ति होती रहे तथा भविष्य के लिए भी संसाधन सुरक्षित रहें उसे धारणीय या संपोषणीय विकास कहते हैं। आज विश्व की कुल जनसंख्या का 56 प्रतिशत तथा विश्व के कुल आबादी का 4.4 अरब जनसंख्या शहरों में निवास करती है। जनसंख्या का विश्लेषण करने वाले विद्वानों का यह अनुमान है कि आज 10 में से 7 व्यक्ति शहरों में निवास करता है। यदि शहरीकरण की इस बढ़ती हुई प्रक्रिया का उचित तरीके से प्रबन्धन एवं नियमन किया जाये तो यह सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक प्रसंग को एक नवीन आयाम प्रदान कर सकती है।
हालांकि तीव्र गति से बढ़ती हुई जनसंख्या वृद्धि अनेक दुष्परिणामों को भी जन्म देती है जैसे- निम्न लागत के आवास, परिवहन के साधनों का अभाव, पेयजल एवं विद्युत का संकट, जीवनयापन के बुनियादी सेवाओं की कमी तथा बेरोजगारी। शहरी सुविधाओं को प्राप्त करने हेतु ग्रामीण जनसंख्या का एक बड़ा भाग शहरों की ओर प्रवास कर रहा है जिससे शहरी 4.1 जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि हो रही है।
एक बार जब किसी शहर का निर्माण हो जाता है तो उस शहर का भौतिक स्वरूप पीढ़ियों दर पीढ़ी अपरिवर्तित हो जाता है, जिसके परिणाम स्वरूप शहरों में अस्थिरता उत्पन्न होती है, इस प्रकार शहरीकरण में वृद्धि भूमि और प्राकृतिक संसाधन पर दबाव डालती है, जिसके परिणामस्वरूप ऊर्जा खपत में वृद्धि तथा ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में तीव्र वृद्धि देखी गई। इस प्रकार शहरीकरण का प्रबन्धन एवं नियमन समय की अनिवार्य विशेषता बन गया है। इसी समस्या को देखते हुए हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी जी द्वारा 25 जून 2015 को स्मार्ट सिटी मिशन (Smart City Mission) प्रारम्भ किया गया ताकि देश के 100 शहरों को स्मार्ट शहर में बदलकर शहरों में निवास करने वाले लोगों को गुणवत्ता युक्त शहरी सुविधाओं को उपलब्ध कराया जा सके। मानव समाज के विकास के प्रारम्भिक अवस्था से ही नगर आर्थिक विकास के केन्द्र बिन्दु रहे हैं और भारत इससे अछूता नहीं है। सिन्धु घाटी सभ्यता का नगर नियोजन इसका उत्कृष्ट उदाहरण रहा है।
भारत में हुई वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल आबादी का 31 प्रतिशत जनसंख्या शहरों में निवास करती है और सकल घरलु उत्पाद (GDP) में लगभग 63% योगदान करती है। बड़े पैमाने पर हो रहे नगरीकरण को देखते हुए आज नगरों को और अधिक स्मार्ट बनाये जाने हेतु तथा नगरीय विकास में वृद्धि हेतु, नगरीय जीवन में सुधार करने हेतु, पूंजी निवेश को बढ़ाये जाने हेतु नवीन उपाय खोजने की आवश्यकता है। इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने सभी राज्यों एवं संघ राज्य क्षेत्रों में 100 नगरों को स्मार्ट बनाने की पहल की। इस कार्य हेतु भारत सरकार ने वर्ष 2015-16 से 2019-20 तक की समयाअवधि निर्धारित की। स्मार्ट सिटी की अवधारणा एक नवीनतम अवधारणा है जिसका उद्भव स्मार्ट सिटी और नगरीकरण के फलस्वरूप उत्पन्न समस्याओं के समाधान के लिए हुआ। यद्यपि स्मार्ट सिटी की कोई निश्चित परिभाषा नहीं है इसकी अवधारणा विभिन्न देशों की भौगोलिक स्थिति और आर्थिक स्तर तथा जीवन के दृष्टिकोण के अनुसार परिवर्तित होती रहती है। स्मार्ट सिटी योजना का उद्देश्य अपने नागरिकों को उचित गुणवत्तापूर्ण जीवन जीने के लिए प्रेरित करती है जो आगे चलकर अन्य देशों के लिए उचित मॉडल की रूपरेखा का क्रियान्वयन कर सके।
स्मार्ट सिटी के आधारभूत तत्व: शहरी विकास मंत्रालय द्वारा स्मार्ट सिटी के निम्नलिखित प्रमुख आधारभूत तत्व बताये गए है-
1. पर्याप्त जल आपूर्ति
2. विद्युत आपूर्ति
3. नगरीय गतिशीलता एवं सार्वजनिक परिवहन
4. सुशासन, विशेषकर ई-शासन, नागरिक भागीदारी और सतत् पर्यावरण
5. नागरिकों विशेषकर महिलाओं, बच्चों एवं बुर्जुगों की सुरक्षा
6. उचित स्वास्थ्य शिक्षा
स्मार्ट सिटी की विशेषताएँ: एक स्मार्ट सिटी के अन्तर्गत निम्न विशेषताएँ दृष्टिगोचर होती है -
1. मिश्रित भूमि उपयोग को बढ़ावा
2. व्यापार सुगमता केन्द्र
3. टेलीमेडिसिन और टेली एजुकेशन
4. नागरिकों हेतु उपयुक्त आवास
5. उचित परिवहन के साधन
स्मार्ट सिटी योजना में अन्य तथ्यों को निम्न बिन्दुओं के माध्यम से स्पष्ट किया जा सकता है-
स्मार्ट समाधान (Smart Solutions): स्मार्ट सिटी विवरण के अनुसार 21 स्मार्ट समाधान है जिन्हें मुख्यतः6 उपवर्गों में विभाजित किया जा सकता है जो निम्न है-
E Governance and Citizen Services:
1. Public Information, Grivence Redressal
2. Citizen Engagement
3. Electronic Service Delivery
4. Citizens City's Eyes and Ears
5. Video Crime Monitoring
Waste Management
1. Waste to Energy and Fuel
2. Waste to Compost
3. Waste Water Should be treated
4. Recycling and Reduction of C and D waste
Water Management
1. Smart Meters and Management
2. Leakage Identification, Preventive Maint
3. Water Quality Monitoring
Energy Management
1. Smart Meters and Management
2. Renewable Sources of energy
3. Energy Efficient and Green Buildings
Urban Mobility
1. Smart Parking
2. Intelligent Traffic Management
3. Integrated Multi-Model Transport
Others
1. Tele-medicine and Tele Education
2. Incubation/Trade Facilitation centers
3. Skill Development Centers
स्मार्ट सिटी योजना का प्रारम्भ वर्ष 2015 में आवास और शहरी मामले का मंत्रालय द्वारा 100 शहरों के विकास हेतु 5 साल की अवधि वर्ष 2015-16 से 2019-20 तक के लिए किया गया इस योजना में सम्मिलित शहरों को निम्न चित्र के माध्यम से दर्शाया जा सकता है-
चित्र 1 - Smart cities in each state and UT
चित्र 2 - Under Smart City Missions
चूँकि उत्तर प्रदेश भारत का जनसंख्या के दृष्टिकोण से सबसे बड़ा राज्य है, अतः इस योजना के अन्तर्गत इसके सबसे ज्यादा 17 शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने का दायित्व दिया गया इसके अन्तर्गत पहले चरण में लखनऊ, दूसरे चरण में कानपुर, आगरा और वाराणसी, तीसरे चरण में प्रयागराज (इलाहाबाद), अलीगढ़ तथा झाँसी तथा चौथे चरण में बरेली, मुरादाबाद, सहारनपुर का चयन किया गया। इसके अतिरिक्त मुख्यतंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने अयोध्या, गोरखपुर, गाजियाबाद, फिरोजाबाद, मथुरा, वृन्दावन, मेरठ और शाहजहाँपुर को भी स्मार्ट सिटी के अन्तर्गत चुना है।
प्रयागराज जिसे पूर्व में इलाहाबाद के नाम से जाना जाता था, उत्तर प्रदेश की न्यायिक, शैक्षिक और धार्मिक राजधानी है। प्रयागराज का क्षेत्रफल 5482 वर्ग किमी0 है यहाँ की कुल जनसंख्या 59,54,391 है। यहाँ अत्यधिक जनसंख्या वृद्धि के परिणामस्वरूप स्मार्ट सिटी योजना का यहाँ के नागरिकों के सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक, राजनैतिक क्षेत्रों पर व्यापक प्रभाव पड़ा है।
चित्र 3 - Allahabad Smart City
स्मार्ट सिटी योजना के आने के बाद यहाँ के नागरिकों के जीवनस्तर में व्यापक सुधार हुआ है किन्तु और सुधार शेष है। यहाँ के प्रमुख नगरीय क्षेत्र कटरा, सिविल लाइन्स, मम्फोर्डगंज, सलोरी, अल्लापुर, राजापुर, गोविन्दपुर सलोरी है इनमें से कुछ क्षेत्रों में नगरीय सुविधाओं का बाहुल्य है किन्तु कुछ क्षेत्र आज भी सुविधाओं के अभाव में है। स्मार्ट सिटी योजना के अन्तर्गत प्रयागराज में स्वच्छ भारत मिशन, अमृत योजना, अटल मिशनकार, कायाकल्प, संवर्द्धन योजना डिजिटलीकरण भारत तथा प्रयागराज में वन सिटी वन एप जैसी योजनाएँ स्मार्ट सिटी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
शोध समस्या (Research Problem):
नगरीय क्षेत्र मानव हेतु आकर्षण के कारण (Push Factors) के रूप में कार्य करते हैं। यही कारण है शहरों में निरन्तर जनसंख्या वृद्धि को प्रोत्साहन मिलता जा रहा है। जनसंख्या में अत्यधिक वृद्धि के कारण वहाँ के नागरिकों को उचित स्वास्थ्य सुविधाएँ, शिक्षा, कम के आवास और बुनियादी ढाँचे की आवश्यकता होती है लागत के आवास और बुनियादी ढाँचे की आवश्यकता होती है। इस प्रकार संसाधनों के उचित प्रबन्धन, स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने, जलवायु परिवर्तन के लिए उचित रणनीति, सुव्यवस्थित परिवहन एवं शहरीकरण में सामजंस्य स्थापित करने हेतु स्मार्ट सिटी योजना अस्तित्व में आई। प्रयागराज जिले की आधी से अधिक जनसंख्या नगरों में निवास करती है। यहाँ आज भी यातायात, परिवहन, आवास प्रतिरूप महिला सुरक्षा, ऊर्जा प्रबन्धन, सड़क व्यवस्था में एकरूपता नहीं है। शहर का एक प्रमुख वर्ग प्रतिदिन इन कुव्यवस्थाओं से कहीं न कहीं प्रभावित है। शहर में कुछ क्षेत्र तो विकास की प्रक्रिया में आगे है किन्तु कुछ क्षेत्रों में विकास की प्रक्रिया आज भी मन्द गति से चल रही है।
इन प्रमुख समस्याओं को देखते हुए ही स्मार्ट सिटी योजना का प्रयागराज के संसाधनों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, का अध्ययन करने हेतु मेरे द्वारा इस शोध पत्र में प्रयागराज स्मार्ट सिटी योजना का यहाँ के मानवीय और प्राकृतिक संसाधनों पर क्या प्रभाव पड़ेगा का अध्ययन किया जायेगा।
अध्ययन क्षेत्र (Study Area Prayagraj):
जनसंख्या और क्षेत्रफल के दृष्टिकोण से प्रयागराज उत्तर प्रदेश के प्रमुख जिलों में से एक है। इसका अक्षांशीय और देशान्तरीय विस्तार 25 ͦ28 N से 81 ͦ54 E है सम्पूर्ण विश्व में प्रयागराज अपने धार्मिक इतिहास एवं वर्तमान के लिए विख्यात है। इसका सम्पूर्ण विस्तार गंगा के मध्यवर्ती मैदानी क्षेत्रों में है और गंगा प्रयागराज में अपने सबसे बड़े पाट का निर्माण करती है। भौगोलिक दृष्टिकोण से प्रयागराज को तीन भौगोलिक क्षेत्रों में बाँटा गया है-
(1) गंगा का मैदानी क्षेत्र।
(2) यमुना का मैदानी क्षेत्र।
(3) गंगा यमुना का दोआब क्षेत्र।
गंगा और चमुना के इस सम्पूर्ण क्षेत्र जिसे इलाहाबाद के नाम से जाना जाता था, में संगम में गंगा और यमुना जैसी नदियों का संगम होता है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार प्रयागराज नगर लगभग 70 कि0मी0 क्षेत्र में फैला है और इसकी जनसंख्या 1,168,385 व्यक्ति है। प्रशासनिक दृष्टिकोण से प्रयागराज को 80 वार्डों में बाँटा गया है।
चित्र 4 - llahabad City (Map)
प्रयागराज जिले के संदर्भ में कुछ तथ्य
|
S. No. |
Category |
Year 2001-2002 |
Year 2010-2011 |
CAGR 2010-11/2001-02 |
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1. |
Population |
1018092 |
1117094 |
0.93% |
|
2. |
Population Density |
|
8786.05 |
|
|
3. |
Municipal Wards |
40 |
80 |
7.18% |
|
4. |
Family Size |
7.4 |
7.6 |
0.27% |
|
5. |
Area Sq. Km. |
170.27 |
170.27 |
0.0% |
|
6. |
Number of Slum Area |
185 |
356 |
6.76% |
|
7. |
Households |
136680 |
208000 |
4.29% |
|
8. |
Commercials and Other Establisments Hotels & Restaurants |
3106 |
4046 |
2.68% |
Source : City sanitation plan prayagraj and author own calculation.
अध्ययन विधि: इस अध्ययन हेतु प्राथमिक और द्वितीयक दोनों स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग किया गया है। प्राथमिक आँकड़ों को प्रश्नावली विधि के द्वारा विभिन्न नागरिकों से प्राप्त किया गया है, जबकि द्वितीयक आँकड़ों को प्राप्त करने के लिए विभिन्न सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं के वेबसाइट और पोर्टल का उपयोग किया गया है। इन सभी के अलावा उत्तर प्रदेश सरकार के विभिन्न वेबसाइट और पोर्टलों का प्रयोग इस अनुसंधान कार्य में किया गया है। इसके अलावा इस अध्ययन पत्र से जुड़े कई शोधपत्रों, पत्र-पत्रिकाओं, रिपोर्ट, सर्वे, गैर सरकारी संगठनों आदि के आँकड़ों तथा तथ्यों का उपयोग वांछित उद्देश्यों को पूरा करने हेतु किया गया है। प्रयागराज जिला जनसंख्या जनगणना, प्रयागराज नगर निगम, उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग, प्रयागराज विकास प्राधिकरण से प्राप्त आँकड़ों का प्रयोग किया गया है।
प्रयागराज में स्मार्ट सिटी योजना के लाभ और हानियाँ: प्रयागराज में स्मार्ट सिटी योजना के लाभ और हानियों को निम्न प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है-
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S. No. |
प्रयागराज में स्मार्ट सिटी योजना के लाभ |
प्रयागराज में स्मार्ट सिटी योजना के हानिया‘ |
|
1. |
Improved Infrastructure |
Privacy Concerns |
|
2. |
Sustainable Development of City |
Digital Divide |
|
3. |
Enhanced Safety and Security |
Cyber Security Risks |
|
4. |
Improved Quality of Life |
Cost |
|
5. |
Economic Development |
Job Displacement |
|
6. |
Citizen Participation |
Social Isolation |
Source : Hindi tech academy.com
प्रयागराज के मानवीय और प्राकृतिक संसाधनों का धारणीय विकास के सन्दर्भ में SWOT विश्लेषण:-
प्रयागराज के मानवीय और प्राकृतिक संसाधनों का धारणीय विकास के संदर्भ में SWOT विश्लेषण को निम्न प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है- प्रयागराज के मानवीय और प्राकृतिक संसाधनों का धारणीय विकास के सन्दर्भ में SWOT विश्लेषणः
S-Strengths
Strong historical and cultural identity
Higher education centre
Natural resource base of agricultural produce
Well connected transport and water system
Well developed urban services
W-Weakness
Lack of integrated strategy to support and sustain tourism
Higher education system do not support local economy
Stagnant manufacturing and industrial growth
Lack of air connectivity to the city
Urban focus does not encourage compact development
O-Oppurtinities
Organizing and formalizing the Sangam and Triveni
Rich deposists of silica
High yeilds of agro produce, particularly guvavas and Amlas
Making education work for the city
Urban Amenities and connectivity
T-Threats
Flood in Ganga
Uncontrolled housing schemes and property making with in limited land
Unorganizied transport system
Lack of affordable housing
Source : www.researchgate.net
निष्कर्ष और सुझावः
इस अनुसन्धान कार्य से प्राप्त प्रमुख निष्कर्षों और सुझावों को निम्न प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है-
नगर में तीव्र गति से बढ़ती हुई जनसंख्या वृद्धि को ध्यान में रखते हुए नगर निगम को अपनी सुविधाओं में विस्तार करने की आवश्यकता है इसके लिए नगर निगम को नगरीय क्षेत्र में विस्तार करते हुए उपान्त क्षेत्र को भी नगरीय क्षेत्रों में शामिल करके नगरीकरण का विस्तार करना चाहिए यथा- झूंसी, सहसों, हण्डिया इत्यादि उपान्त क्षेत्रों में नगरीकरण का विस्तार किया जाए।
पर्यावरण के सन्दर्भ में प्रयागराज का प्रदर्शन निम्न है स्मार्ट सिटी योजना के अन्तर्गत बहुत वृक्ष काटे गए है अतः प्रयागराज नगर निगम को वृक्षारोपण को बढ़ावा देकर ग्रीन मफलर की स्थापना सड़कों के किनारे करनी चाहिए।
प्रयागराज नगर में प्रदूषण के नियंत्रण अपशिष्ट जल के प्रबन्धन और ठोस तथा तरल अपशिष्ट के पुर्नचक्रण व्यवस्था में सुधार करने की आवश्यकता है इसके लिए आवश्यक है कि नगर-निगम को अल्लापुर, कटरा, सिविल लाइन्स, सलोरी, दारागंज में अपशिष्ट केन्द्रों को स्थापित करके अपशिष्टों का पुर्नचक्रण करें जिससे नागरिकों को स्वच्छता पूर्ण वातावरण मिल सके।
इस प्रकार प्रयागराज को एक स्मार्ट नगर बनाने हेतु नगरीय प्रशासन निजी क्षेत्र, गैर लाभकारी संस्थाओं, शोधकार्य, सार्वजनिक नीजि भागीदारों, केन्द्र एवं राज्य सरकार की सहायता, आदि की आवश्यकता है तभी प्रयागराज को स्वप्नों का शहर बनाया जा सकता है।
संदर्भ और प्रकाशनों की सूची:-
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2. शर्मा, शिखा और प्रो0 आर0सी0 सिंह, स्मार्ट सिटी मिशन: स्मार्ट प्रयागराज के निर्माण की ओर एक कदम Vol.-11, issue-04 October-December-2023
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5. बी0बी0सी0 हिन्दी (2013), क्या आप स्मार्ट सिटी में रहना चाहेंगे।
6. महामीडिया ऑनलाइन (2014) माल्टा और कोच्चि की झलक होगी भोपाल स्मार्ट सिटी में
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9. लोकसभा सचिवालय शोध और सूचना प्रभाग
10. सिंह, नारायण भोगेन्द्रर एवं प्रो0 प्रशान्त घोष (2022), Sustainable path of Urbanization in India, A case Study of Prayagraj City" JETIR.ORG@2022 JETIR June 2022, Volume 9, issue 6.
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12. "Smart cities in India" a report, 2015
13. इन्दौर में स्मार्ट सिटी-एक केस स्टडी सी0एक0ए0 नई दिल्ली, मार्च 2020
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Received on 19.04.2025 Revised on 21.05.2025 Accepted on 16.06.2025 Published on 22.08.2025 Available online from September 05, 2025 Int. J. Ad. Social Sciences. 2025; 13(3):125-134. DOI: 10.52711/2454-2679.2025.00020 ©A and V Publications All right reserved
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This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-ShareAlike 4.0 International License. Creative Commons License. |
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